एक घने जंगल में एक छोटी सी गिलहरी रहती थी, जिसका नाम था चुन्नी। वह बहुत मेहनती थी और हर दिन सर्दियों के लिए मेवे इकट्ठा करती थी।
उसी पेड़ पर एक कौआ भी रहता था, जो बहुत आलसी और लालची था। वह खुद कभी मेहनत नहीं करता था, बल्कि दूसरों का इकट्ठा किया हुआ खाना चुराने की कोशिश करता रहता था।
एक दिन चुन्नी ने अपने बिल में ढेर सारे बादाम और अखरोट जमा किए। कौए ने यह देख लिया और सोचा, “इतनी मेहनत क्यों करूं? मैं चुन्नी के बिल से ही खाना उड़ा लूंगा।”
रात होते ही कौआ चुपके से पेड़ पर उतरा और बिल के पास पहुंचा। लेकिन चुन्नी होशियार थी। उसने पहले ही अपने बिल के दरवाज़े पर कांटेदार टहनियां बिछा दी थीं और असली मेवे एक गुप्त जगह पर छुपा दिए थे।
कौआ जैसे ही बिल में घुसने लगा, कांटे उसके पंखों में चुभ गए। वह ज़ोर से चिल्लाया और उड़ते-उड़ते पेड़ से नीचे गिर पड़ा। बाकी पक्षियों ने यह देखा और खूब हंसे।
अगली सुबह चुन्नी ने कौए से कहा, “अगर तुम भी मेहनत करते, तो आज तुम्हारे पास भी अपना भंडार होता। दूसरों की मेहनत चुराने से कभी सुकून नहीं मिलता।”
कौए को अपनी गलती का एहसास हुआ। उस दिन के बाद उसने भी खुद खाना इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
सीख: मेहनत से कमाया हुआ सुख सबसे बड़ा होता है। दूसरों की चीज़ों पर बुरी नज़र रखने वालों को हमेशा नुकसान ही होता है।